करुणा झा 
कोरोना वायरसस’ तबाह दुनियामें फेर एकटा नव संयोजन. आई भोरस’ हन्ता वायरस ल’ कए पूरा दुनिया सशंकित भ’ उठल । दुनु वायरसके उत्पति चीनस’ । दुनु वायरसमें दुनियाके विशाल आवादीके समाप्त करबाक क्षमता छै ।
अचानक चीन आ’ वायरसके ई अन्तरसम्वन्ध देखिकए मोनमें प्रश्न स्वाभाविक जे आखिर चीन कियाक एहेन वायरस सबके प्रजनन केन्द्र बनल अछि ? विगत किछु सालके चीनके विकास देखिकए दुनियाँ अचम्भित छल । देखैत देखैत चीन दुनियाँके उत्पादन केन्द्र बनि गेल । छोटछिन दैनिक जरुरतके सामग्री होय वा इन्जिनियरिंग आ इलेक्ट्रोनिक्सके सामान सबटा सबस सस्ता दाम पर चीनमें उत्पादन होमय लागल.। स्थिति एहेन बनल जे आब देश अपना देशमें उत्पादन बन्द करि चीनस’ आयात करबाक लेल उद्योगी भेल । विस्तारवादी चीन एकर फांकमें पूरा दुनियामें अपन पैर पसार लागल. छोट छोट देशके बेसी बेसी कÞजर्Þ द’ कए ओकर सत्ता नियन्त्रण करबामें चीन अगुवा बनल ।
आई गम्भीरतास’ देखियौ त चीन के विकल्प दुनियाँ लग नै छै । विगत दू दशकस’ चीन पर आश्रित विश्व अर्थव्यवस्था अचानक धराशायी होमयवाला अछि । ककरो लग उत्पादन हेतु कच्चा माल नहि छैक आ’ नहि तकनीक उपलब्ध छै । सबटा केन्द्रित क’ चीन विश्व पर शासन करवाक दिशामें बढि चुकल छैक ।
एखन अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, अस्ट्रेलिया, भारत सब कोरोनाके कहरस’ कराहि रहल अछि आ चीन एकटा पर एकटा वायरस के संप्रसारित क’ दुनियाँ के हिलौने अछि । भारतके मुश्किल जे एखन एकर पड़ोसी सबटा देश चीन के आधिपत्यमें छैक । चाहे पाकिस्तान हो वा नेपाल, बाङ्गलादेश हो या श्रीलंका । एतय तक की भूटान तक चीन के प्रभाव में जा’ चुकल अछि । सबके चीन अर्थबलस’ खरीद चुकल अछि ।
एहेन समयमें भारतके लेल बड्ड कठिन समय छैक । एक दिस कोरोना, हन्तास’ सुरक्षा दोसर दिस अर्थव्यवस्था के मजÞबूती । नव आर्थिक दृष्टिकोण आ’ प्रबल परिवर्तनके बिना ई असम्भव अछि । पूरा दुनियाँ कोरोनाके बाद कोन दिस डेग बढ़ाओत से समयके प्रतीक्षा । मुदा भारतके सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्वके ई तत्काल निर्णय लेबय पड़तैक जे देशके नीक कोना संभव । नहि त भविष्य संकटग्रस्त हेतैक ताहिमे कोनो दुविधा नहि । (लेखिका झा विभिन्न भाषामे कलम चलवैत छथि ।)