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आजादी

आजादी

~गजेन्द्र गजुर~

हनुमाननगर-२, सप्तरी
आजादीके ज्वाला दनकैत
रहतै,
ओसब ओहिना फनकैत रहतै,
जुलुम कले चिच्यानञि रति
भरि,
चाहे बिरुद्धमे सनकैत
रहतै,
इन्कलाम जिन्दाबाद ऽ क
नारा भेल,
नसंहारी अहिना झरकैत
रहतै,
उगले आजादीके चान चारु
भर,
जुल्मीके मन चनकैत रहतै,
बुझले भेलै सबठा सोर गजुर,
मधेशी सगरे गनकैत रहतै

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About The Author

लेखक यादव पत्रकारिताका साथै भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन, ऐतिहासिक एवम् पुरातात्विक क्षेत्रमा कलम चलाउँछन् (सं) ।