~गजेन्द्र गजुर~
हनुमाननगर-२, सप्तरी
आजादीके ज्वाला दनकैत
रहतै,
ओसब ओहिना फनकैत रहतै,
जुलुम कले चिच्यानञि रति
भरि,
चाहे बिरुद्धमे सनकैत
रहतै,
इन्कलाम जिन्दाबाद ऽ क
नारा भेल,
नसंहारी अहिना झरकैत
रहतै,
उगले आजादीके चान चारु
भर,
जुल्मीके मन चनकैत रहतै,
बुझले भेलै सबठा सोर गजुर,
मधेशी सगरे गनकैत रहतै
