अशोक दत्त
वर्ष २०१५ के देल टीस बिसरऽ चाहै छी
आश अछि तोहर आगमन
बिसरा देत सभ पीड़ा ।
भूकम्पसँ उजरल घर
क्षत् विक्षत् भेल परिवार
अन्न–वस्त्र आ छतक आभाव
जाढ़सँ ठिठुरैत बच्चासँ बूढ़
दवाइ बिनु काहि काटब
सब बिसरऽ चाहै छी
आश अछि अहि वर्ष
ओहि पीड़ासँ भेटत मुक्ति ।
नइँ जानि केना “कैक्टस” बनल देश
जकरा सम्पर्कसँ
लेहु–लेहुवान भेल आत्मा
बँटा गेल अछि अपने समाङ
सौंस खीराक भीतर रहल तीन फाँक सन
आधा देश अन्हारमे डूबल
आधा मनाओल दीवाली
अपने देशमे दू रंग
सब बिसरऽ चाहै छी ।
आश अछि तोहर आगमनसँ
बन्द भऽ जाएत खून–खराबा
नइँ खाए पड़तै ककरो छाती आ माथमे गोली
नइँ करऽ पड़तै मृत्यु वरण
नइँ हएत केओ अपाङ्ग
आ ने करऽ पड़तै
चूल्हि पजारबाक चिन्ता,
अपन घरक समस्या
सल्टाओल जाएत घरेमे ।
नक्शामे अँटाओल जाएत
सभक चित्र समान रुपसँ
भेटतै सभके अधिकार, सम्मान आ पहिचान ।
आश अछि तोहर आगमनसँ हँटत विभेद
लगाओत घाओपर मलहम,
दलके दलदलमे फँसल देशक पहिया
निकालत सभ मीलि कऽ
सुगुम हएत बाट आ
सहजतासँ चलत देश ।
बिसरऽ चाहैत छी
अतीतक टीस
आश अछि तों बिसरा देबऽ सब पीड़ा
कामना करैत छी तोहर आगमन शुभ हो ।।