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अगहन केर रवि

अगहन केर रवि

एकसंझा अगहन केर रवि शनिकेँ प्रथम अर्घ्य दिन सँ शुरू होइवला ई पावैन स्त्रीक लेल अति श्रद्धेय मानल जाइत अछि। मैथिल स्त्री पवित्रता सौँ बिना नून केर जेकरा जे भेल से बना दुपहर में ठौं कय नैवेद्य साजि धूप दीप जरबैत दिनकर केँ प्रणाम कय स्वयं भोजन ग्रहण करैत छथि । जलो नै दोसर बेर ग्रहण करैत छथि। फेर दोसरे दिन किछु ग्रहण करती। ई क्रम बैशाख धैर चलैछ। जावत फेर दिनकर केँ दोसर अर्घ्य नै देल जाइत अछि, से आइये छल। संतान पति परिवार केर रक्षाक लेल धर्म नगरी मिथिलाक स्त्री ई पावैन करैत छथि।
कठिन तप अपन मिथिलाक धार्मिक परंपरा सँ ओतप्रोत सनातन धर्म केर प्रमुख स्तम्भ छी। कियैक नहि, जाहि ठामक एतेक पवित्र सतत परसुखक लेल अपन जीवन अर्पित करै वाली स्त्री छथि ओ मिथिला भूमि कतेक पवित्र कियैक नहि हो। जय माँ जानकी! प्रणम्य अछि मैथिल केर संस्कार। आरती झाक फेसबुकसँ

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लेखक यादव पत्रकारिताका साथै भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन, ऐतिहासिक एवम् पुरातात्विक क्षेत्रमा कलम चलाउँछन् (सं) ।

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