देवेन्द्र मिश्र
नव सम्बिधान निर्माणसँ पहिनहुँ आ सम्बिधान घोषणा भऽ गेलाक बादो ई दू टा शब्द ः समानुपातिक आ समावेशी, बहुते चर्चा आ सर्वाधिक सरोकारक विषय बनि गेल अछि । ई लगभग सभ मधेशवासी बुझए लागल अछि जे राज्यक सभ क्षेत्रमे जनताकें समानुपातिक समावेशी सहभागिता होएबाके चाही । तैं नेपालक तराइ–मधेशक भूभागमे रहल नागरिक देशक सभ क्षेत्रमे समानुुुपातिक सहभागिताक गप उठबए लागल अछि आ राज्यक सभ निर्णायक निकायसभमे अपन समानुपातिक उपस्थिति चाहैत अछि । दू–दू बेर भेल जनआन्दोलन, तीन–तीन बेरक मधेश विद्रोह आ मधेश आन्दोलनसभ आ लगभग १५ हजारक जान लैत भेल सशस्त्र विद्रोहः सभटाक मुख्य मुद्दा इएह छलहो ।
ओना विक्रम सम्वत २०६३ मे बनल अन्तरिम सम्बिधानमे समानुपातिक समावेशीक गप कएल गेल अछि आ तकर वाद सरकारी नोकरीसभमे ४५ प्रतिशत समावेशिता कएलो गेल, मुदा ओहो व्यवस्था समावेशिता समानुपातिक लाताक मूल भावनाकें नहि समेटि सकल अछि । वर्तमान सम्बिधानक पृष्ठपोषकलोकनि एकर चर्चो खूब करैत छथि । ओहिमे व्यवस्था ई अछि जे कुल सीटमेसँ ५५ प्रतिशतक लेल खुला विज्ञापन होए आ बाँकी ४५ प्रतिशतकें १०० प्रतिशत मानि मधेशी, आदिवासी, दलित, जनजाति, महिलाकें समावेशी सीट देल जाए । एहिमे भऽ ई रहल अछि जे महिला, दलित, जनजाति, आदिवासी कोटामे पूरे नेपालक सभ केओः पर्वतीय आ मधेशी, दूनूकें समावेश कएल जाइत अछि, जाहिसँ खास कऽ कए मधेशी महिला, दलित, जनजाति आदिकें फेरो सहभागिता आ लाभ नहि के बराबर होइत अछि ।
एखन धरि एकटा गप की तऽ बुझाओले नहि गेल अछि अथवा बुझबाक प्रयासे नहि भेल अछि जे नेपालमे भाषा, संस्कृति, शारीरिक आकृति आ खान–पहिरनक हिसाबसँ दू प्रकारक लोकसभक बसोवास अछि । एक ः ओ जनसमुदाय जे राज्यक एकीकरणकर्ता कहल गेल पृथ्वी नारायण शाहद्वारा अधिग्रहण करबासँ पहिने तराइ –मधेश भूभाग पर रहए बला एहि ठामक आदिवासी मधेशी समुदायक लोकसभ आ बादमे सुगौली सन्धिक बाद ओइ पार पड़ि गेल आ एइ पार बसए लेल २५–३० पुश्ता पहिनहिं आएल मधेशी मूलक लोकसभ । दूः विभिन्न कारणसँ भारत अथवा चीन, मङ्गोलिया, बर्मा, सिक्किम, आसामसँ आबि पर्वतीय भूभागमे बसोवास कएल आ बादमे तराइओमे बसाइ सराइ करए बला अलग भाषा, पहिरन, रहन–सहनक लोकसभ । एहि दू तरहक जनसमुदायमे, आश्चर्यक गप की अछि जे, किछु अपवादकें छोड़ि कऽ, एखनहुँ धरि एक दोसरकें सहज रूपमे स्वीकार करबाक अवस्था नहि आबि सकल अछि । बारम्बार एकेटा भूल जानि कऽ वा अनजानमे की होइत रहल अछि जे पर्वतीय प्रदेशक मूल रहल लोकसभ मधेशीकें भारतीय, बिहारी आदि बुझैत छथि, जाहिमे कत्तहु यथार्थता नहि अछि । खास कऽ कए काठमाण्डूवासीलोकनि आ आब काठमाण्डूएकें अप्पन स्थायी आवास बनौनिहार पर्वतीयो मूलक लोकसभ नÞेपालक अर्थ काठमाण्डूएटा आ नेपाली माने काठमाण्डूए वासी वा पर्वतीये मूलक लोकटा बुझैत अछि । काठमाण्डूमे दू गोटेकें झगड़ा भेल आ जखन पुछल गेल जे ककरा–ककरा झगड़ा भेल तऽ उत्तर देल गेल एकटा नेपाली आ एकटा मधेशीकें झगड़ा भेल । ई अवस्था एखनहुँ, नहि खुलि कऽ त ऽ मोनो मोन, अछिए बहुते ठाम । अन्तिम समयमे मधेशी दलसभद्वारा भेल सीमा नाकाबन्दीक प्रतिकार करैत एकटा टेलिभिजन अन्तर्वार्तामे एकटा नेता कहलनि– यस समस्यालाई हामी सबै नेपाली डटेर सामना गर्नु पर्छ । एहि ठाम नेपाली शब्दक अर्थ की ? अस्तु ।
दोसर गप, कारण जे हो, राज्यक सभ अङ्ग आ निकायमे आ खास कऽ कए राज्यक नीति निर्माण तहमे सभ दिनसँ पर्वतीये मूलक लोकसभक सहभागिता रहल अछि आ तैं, जान वा अनजानमे मधेशी समुदायक लोकसभ अपनाकें अलग–थलग महसूस करैत रहल अछि । आब लोक एहि दिश जागरुक भेल अछि । लोककें, खास कऽ कए जनजागरणक एहि कालखण्डमे सभकें, राज्यक सभ क्षेत्र, सभटा क्षेत्रमे, अपन बराबर हिस्सेदारीक आवश्यकता स्वाभाविक रूपमे महसूस भऽ रहल अछि । तैं आब लोककें समानुपातिक सहभागिता चाही, ताहि लेल संघर्षो भऽ रहल अछि ।
समानुपातिक समावेशी सहभागिताक लेल एखन लोकक धारणा एहि तरहक अछि, जकरा की तऽ सत्तामे रहल लोकसभ बुझि नहि रहल छथि अथवा बुझए चाहि नहि रहल छथि । समानुपात = सम +अनुपात । अर्थात बराबर अनुपात । एकर अर्थ होइछ जकर जे संख्याँ अछि से अनुपात । समावेशीक अर्थ सभ वर्ग आ समूहकें समावेश कएनाइ । ई एहि शब्दक शाब्दिक अर्थ थिक आ विस्तारमे एकटा अलगे आलेख लिखल जा सकैछ ।
एहि सम्बन्धमे समानुपातिक सहभागिताक परिभाषा नेपालक सन्दर्भमे की होएबाक चाही, ताहि लेल नीचाँ एकटा मार्गचित्र प्रस्तुत कएल जा रहल अछिः
नेपाली नागरिक(१०० %)
मधेशी मूलक नागरिक ( ? %) पर्वतीय मूलक नागरिक ( ? %)
पुरुष (? %) महिला ( ?%) पुरुष (%) महिला (%)
दलित (%) दलित (%) दलित(%) दलित(%)
गैरदलित(%) गैरदलित(%) गैरदलित(%) गैरदलित(%)
आदिवासी(%) आदिवासी(%) आदिवासी(%) आदिवासी(%)
अन्य ?????? अन्य?????? अन्य????? अन्य?????? द्रष्टव्य ः प्रतिशत प्रत्येक १० वर्षमे भेल जनगणनाक आधारमे बदलैत रहत ।
उपर लीखल मार्गचित्रक संक्षिप्त विश्लेषण नीचाँ देल जा रहल अछिः
(१) राज्यक जे जतेक सेवा आयोगसभ, सम्बैधानिक आयोगसभ, संघीय वा प्रादेशिक कानून वा नियम बनेबाक लेल बनए बला समितिसभ, सञ्चारगृहसभ, संसदक दूनू सदनसभ, न्यायालयसभ, सुरक्षा परिषद, खेलकूद सभक निकायसभ, सभ राजनैतिक दलसभक आन्तरिक कार्यसमितिसभ, पदाधिकारी समिति आदिक सङ्ग सेना, प्रहरी, सशस्त्र प्रहरी, निजामती सेवा, शिक्षक सेवा आदिमे ५१ प्रतिशत मधेशी मूलक लेल आ ४९ प्रतिशत पर्वतीय मूलक लोकक लेल निश्चित होए । तहिना मानव अधिकार आयोगमे आ महिला आयोग इत्यादिमे पर्वतीय मूलक लोकसभ आ मधेशी मूलक लोकसभक प्रतिशतक हिसाबसँ समानुपातिक प्रतिनिधित्व होएबाक चाही ।
(२) प्रत्येक निर्वाचनमे व्यवस्थापिका संसदमे समानुपातिक हिसाबसँ प्रत्यक्ष आ समानुपातिक प्रतिनिधित्वक लेल पूर्ण समानुपातिक कोना होएत, ताहि लेल नियोजित व्यवस्था कएल जेबाक चाही । तहिना राष्ट्रीय सभामे सेहो प्रतिशतगत उपस्थितिक सुनिश्चितता होएबाक चाही ।
(३) मधेशी मूलक लोकक लेल निर्धारित ओहि ५१ प्रतिशतक संख्याँकें १०० प्रतिशत बुझि मधेशी पुरुषक लेल पुरुषक जनसंख्याँक आधारमे आ मधेशी महिलाक लेल मधेशी महिलाक जनसंख्याँक आधारमे सीट समानुपातिक निर्धारण होए । मधेशी पुरुषक कोटामेसँ मधेशी पुरुष दलित, मधेशी पुरुष गैरदलित आ मधेशी पुरुष आदिवासीक जनसंख्याँक आधारमे ओकरासभकें समानुपातिक कोटा भेटए । मधेशी महिलाक कोटामेसँ मधेशी दलित महिला, मधेशी गैरदलित महिला आ मधेशी आदिवासी महिलाक जनसंख्याँक आधारमे ओकरासभकें समानुपातिक कोटा भेटए ।
(४) तहिना पर्वतीय मूलक लोकक लेल निर्धारित ओहि ४९ प्रतिशतक संख्याँकें १०० प्रतिशत बुझि पर्वतीय मूलक पुरुषक लेल पुरुषक जनसंख्याँक आधारमे आ पर्वतीय मूलक महिलाक लेल ओहि महिलाक जनसंख्याँक आधारमे सीट समानुपातिक निर्धारण होए । पर्वतीय मूलक पुरुषक कोटामेसँ पर्वतीय मूलक दलित, पर्वतीय मूलक गैरदलित आ पर्वतीय मूलक आदिवासीक जनसंख्याँक आधारमे ओकरासभकें समानुपातिक कोटा भेटए । पर्वतीय मूलक महिलाक कोटामेसँ पर्वतीय मूलक दलित महिला, पर्वतीय मूलक गैरदलित महिला आ पर्वतीय मूलक आदिवासी महिलाक जनसंख्याँक आधारमे ओकरासभकें समानुपातिक कोटा भेटए ।
समानुपातिकता आ समावेशिताक एतेक पारदर्शी आ इमानदार उपाय आओरो किछु भऽ सकैत अछि, से नहि लगैत अछि । एहि सभ व्यवस्थामे आधार बिन्दूक रूपमे निम्नलिखित काजसभ कएले जेबाक चाहीः
(क) विगतक २०६८ सालक जनगणनाक आधारमे मधेशी मूलक आदिवासी पुरुष, आदिवासी महिला, दलित पुरुष, दलित महिला, आदिवासी पुरुष, आदिवासी महिलाक संख्याँ आ पर्वतीय मूलक आदिवासी पुरुष, आदिवासी महिला, दलित पुरुष, दलित महिला, आदिवासी पुरुष, आदिवासी महिलाक संख्याँ सम्बिधानेमे अनुसूचीमे उल्लेख भऽ जेबाक चाही ।
(ख) एकटा अनुसूचीमे नेपालक सभटा मधेशी मूलक जाति, जनजाति, दलित, गैरदलित, आदिवासीक जातिसभक नाम आ तहिना पर्वतीय मूलक जनजाति, दलित, गैरदलित, आदिवासीक जातिसभक नाम सूचीबद्ध कऽ देल जाए ।
(ग) नेपालक जे जतेक राष्ट्रभाषासभ अछि, तकरा सूचीबद्ध करबाक चाही अनुसूचीमे ।
उपर प्रस्तुत कएल विचार एकटा सम्भावित मार्गचित्र छी । सुधीजनसँ आग्रह अछि जे एहिमे सहमति वा असहमतिक सङ्ग सुधारक लेल विचार देल जाए आ एहि अथवा एहने सर्वमान्य मार्गचित्रकें सम्बिधानक एकटा अनुसूचीमे समानुपातिकक परिभाषा वा स्पष्टीकरणक रूपमे उल्लेख करेबाक लेल सम्बन्धित पक्ष प्रयास कएल जाए, जाहिसँ समानुपातिकताक परिभाषा मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्नाः नहि होए ।
(लेखक मैथिली साहित्य परिषद्क पूर्व अध्यक्ष छथि । )