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Crona Awareness

☆’गजल’☆

☆’गजल’☆

         ☆’गजल’☆

माँ मधेश हकन कानि रहल य
दर्द एकर नै ओ जानि रहल य॥

छीनकऽ अनकर हक-अधिकार

चारि-चारि हाथ फानि रहल य॥

समानताके आवाज उठेला बाद,

छाती पर बन्दुक तानि रहल य॥

सब एक्के गाछक डारि-पात छी,

खस सरकार नै मानि रहल य॥

मोनमे राखिकऽ तृष्णाक भण्डार

राष्ट्रवादी अपनाके ठानि रहल य॥

लिला ओकर देखिके ‘विद्यानन्द’

माथ पर कफन बान्हि रहल य॥

विद्यानन्द वेदर्दी राजविराज,सप्तरी हाल:विराटनगर,मोरङ्ग

About The Author

लेखक यादव पत्रकारिताका साथै भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन, ऐतिहासिक एवम् पुरातात्विक क्षेत्रमा कलम चलाउँछन् (सं) ।