देवेन्द्र मिश्र

१७ नवम्बर १९६५ ईश्वीक तिथि विश्व भरि एहि दुआरे चर्चित अछि, किएक तऽ एही दिन संयुक्त राष्ट्र संघक सङ्गठन युनेस्को ८ सितम्बरकें अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवसक रूपमे मनाओल जेबाक निर्णय कएलक । एही निर्णय मोताबिक १९६६ ईश्वीसँ ८ सितम्बरक दिन संयुक्त राष्ट्र संघक सभटा सदस्य देशसभद्वारा अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस ( International Literacy Day ) मनाओल जाइत रहल अछि । हरेक वर्ष एहि दिवस पर अन्तर्राष्ट्रीय नारा निर्धारित कएल जाइत अछि । विश्वक सभ देशसभद्वारा सेहो अपन देशक लेल एहि दिवसक नारा देल जाइत अछि । युनेस्कोद्वारा सम्पूर्ण विश्वक लेल एहि वर्ष अर्थात २०१६ ईश्वीक लेल देल गेल नारा अछि ःReading the Past, Writing the Future अर्थात विगतसँ सिखी आ भविष्यक लेल रेखाङ्कित करी । एकर स्पष्ट भावार्थ ई अछि जे विगत पचास वर्षसँ विभिन्न कार्यक्रमक सङ्ग विविध रणनीति प्रयोग करैत नेपाल सहित विश्व भरि मनाओल जाइत रहल साक्षरता दिवसक सफलता कतेक प्रतिशत प्राप्त भेल अछि आ किएक नइँ अपेक्षित सफलता भेटल अछि, ताहिसँ सीख लैत भविष्यक कार्यदिशा आ रणनिित निर्धारण कएल जेबाक चाही । नेपाल सरकार एहि दिनकें शिक्षा दिवसक रूपमे मनबैत रहल अछि । शिक्षा विभागद्वारा एहि वर्षक शिक्षा दिवसक नारा देल गेल अछि ः समृद्ध राष्ट्र निर्माणक लेल जीवनोपयोगी शिक्षामे लगानी । अर्थात प्रमाणपत्रमुखी शिक्षासँ राष्ट्र निर्माण भेनाइ असम्भव अछि, एहिसँ देशक लेल अपेक्षित जनशक्ति निर्माण नहि भऽ सकैत अछि । तैं जीवनोपयोगी शिक्षा आ जे शिक्षा जीवनमे किछु उपयोगी सिद्ध भऽ सकए, ताहि शिक्षामे लगानी कएल जेबाक चाही ।
१९६५ ईश्वीसँ पहिने साक्षरताक अवस्था एहूसँ भयावह छल आ तैं एहि दिवसक घोषणा कएल गेल छल । साक्षरता दिवस अन्तर्राष्ट्रीय समुदायकें स्मरण कराबैत अछि जे साक्षरता मानव अधिकार थीक आ ई कोनो तरहक पढ़ाइक आधार थीक । जा धरि लोक साक्षर आ शिक्षित नहि होएत ता धरि राष्ट्रक मूल धारसँ ओकरा कटले रहए पड़त आ ओ अपन कोनहुँ भावनाकें प्रस्तुत करबाक अवसरसँ बञ्चित रहत । इएह कारण अछि जे नेपाल सहित बहुते देशसभक सम्बिधानमे तऽ साक्षरताकें मानव अधिकार आ मौलिक हकक रूपमे व्यवस्था कएल गेल अछि ।
एही दुआरे विश्व स्तर पर सबहक लेल शिक्षा कार्यक्रम आनल गेल छल । सन् २००० मे सेनेगलक डकार नामक स्थानमे भेल विश्व शिक्षा मञ्चमे नेपाल सहित विश्वक १६४ राष्ट्रद्वारा सन् २०१५ धरि ६ टा बृहत शैक्षिक लक्ष्य पुरा करबाक लेल एकटा महत्वाकांक्षी एजेण्डाक शुरुवात कएल गेल आ डकार कार्यढाँचा, सबहक लेल शिक्षा ः हमरासभक सामूहिक प्रतिबद्धता’ मे सहमति जनाओल गेल छल ।
अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाओल जेबाक उद्देश्य अछि व्यक्तिगत, सामुदायिक आ सामाजिक रूपमे साक्षरताक महत्वकें आलोकित कएनाइ । प्राप्त तथ्याङ्क मोताबिक संसारक ७७.५ करोड़ युवामे साक्षरताक कमी अछि आ ओसभ एहिसँ प्रभावित अछि । एकर अर्थ ई भेल जे संसारक प्रत्येक ५ युवासभमेसँ एक गोटे निरक्षर अछि । एहिमे दू तिहाइ संख्याँ महिलाक अछि । एखनहुँ धरि ६.७ करोड़ वाल वालिका की तऽ शिक्षाक पहुँचसँ बाहर अछि अथवा ओकरासभक बीचहिमे विद्यालय छोड़बाक अवस्था अछि । एहि तथ्याङ्क अनुसार लगभग ५८.६ प्रतिशतसँ कम वयस्क साक्षरता दक्षिण आ पश्चिम एशियाक देशसभमे अछि । संसारमे सभसँ कम साक्षरता रहल देशसभ बुराकिनो फासो, माली आ नाइजर अछि । नेपालोमे एखनहुँ धरि साक्षरताक प्रतिशत ६० सँ बेसी नहि भऽ सकल अछि ।
१९६५ ईश्वीसँ पहिने साक्षरताक अवस्था एहूसँ भयावह छल आ तैं एहि दिवसक घोषणा कएल गेल छल । साक्षरता दिवस अन्तर्राष्ट्रीय समुदायकें स्मरण कराबैत अछि जे साक्षरता मानव अधिकार थीक आ ई कोनो तरहक पढ़ाइक आधार थीक । जा धरि लोक साक्षर आ शिक्षित नहि होएत ता धरि राष्ट्रक मूल धारसँ ओकरा कटले रहए पड़त आ ओ अपन कोनहुँ भावनाकें प्रस्तुत करबाक अवसरसँ बञ्चित रहत । इएह कारण अछि जे नेपाल सहित बहुते देशसभक सम्बिधानमे तऽ साक्षरताकें मानव अधिकार आ मौलिक हकक रूपमे व्यवस्था कएल गेल अछि ।
एही दुआरे विश्व स्तर पर सबहक लेल शिक्षा कार्यक्रम आनल गेल छल । सन् २००० मे सेनेगलक डकार नामक स्थानमे भेल विश्व शिक्षा मञ्चमे नेपाल सहित विश्वक १६४ राष्ट्रद्वारा सन् २०१५ धरि ६ टा बृहत शैक्षिक लक्ष्य पुरा करबाक लेल एकटा महत्वाकांक्षी एजेण्डाक शुरुवात कएल गेल आ डकार कार्यढाँचा, सबहक लेल शिक्षा ः हमरासभक सामूहिक प्रतिबद्धता’ मे सहमति जनाओल गेल छल ।
सन् २००० सँ एखन धरि विश्वमे एहि क्षेत्रमे बहुते प्रगति भेल अछि, मुदा सबहक लेल शिक्षाक
मामिलामे अपेक्षित प्रगति नहि कएल जा सकल अछि । सरकार, नागरिक समाज आ राष्ट्रीय तथा
अन्तर्राष्ट्रीय समुदायक बहुते प्रयासक बादो नेपाल सहित विश्वक बहुते रास देशसभद्वारा सबहक लेल शिक्षाक लक्ष्यसभ हासिल नहि कएल जा सकल अछि । परन्तु एकर सकारात्मक पक्ष ई अछि जे सन् २००० क तुलनामे विद्यालयक पहुँचसँ बाहर रहल बाल बालिका आ किशोर किशोरीसभक संख्या अखन लगभग आधा घटिे गेल अछि । सबहक लेल शिक्षा अभियानमे भेल तिव्र प्रगतिक कारणें डकार सम्मेलनक बाद आओरो ३४ मिलियन बाल बालिकासभ विद्यालय जेबाक आँकलन कएल गेल अछि ।
एकर सबसँ पैघ उपलब्धि तऽ लैङ्गिक समानता आओरो विशेष कऽ कए प्राथमिक शिक्षामे लैङ्गिक
समानता दिश रहल अछि । यद्यपि विश्वक एक तिहाइ देशमे एखनहुँ धरि शिक्षामे लैङ्गिक विभेद कायमे रहल गप तथ्याङ्कमे देखाओल गेल अछि । मुदा एहि सबटा प्रगतिक बाबजुद उपलब्धि सन्तोषजनक नहि रहल विगत १५ वर्षक अनुगमनसभक प्रतिवेदनसभमे देखाओल गेल अछि । सम्प्रतिओ विश्वक करीब ५८ मिलियन बाल बालिकासभ विद्यालयसँ बाहर अछि । करबि १०० मिलियन बाल बालिकासभ प्राथमिक शिक्षा पूरा नहि करए सकल स्थिति अछि । शिक्षामे असमानता तेहेन ने बढिेÞ गेल अछि जे अति विपन्न आ अति पिछड़ल वर्गकें सबसँ पैघ असर पड़Þल अछि । धनी वर्गक बाल बालिकासँ गरीब वर्गक बाल बालिकाक विद्यालय नहि जेबाक सम्भावना चारि गुणासँ बेसी अछि आ प्राथमिक शिक्षा पार नहि करबाक सम्भावना पाँच गुणा बढ़ि गेल अछि । ओना तऽ गरीबी, वेरोजगारी आ विविध प्रकारक द्वन्द्वकें एकर प्रमुख बाधकक रूपमे देखल गेल अछि । मुदा, एकर अतिरिक्त प्रमुख कारण इहो देखल गेल अछि जे अधिकांश देशसभमे वाल वालिकाकें ओकरासभक मातृभाषाक माध्यमसँ शिक्षा नहि देल जाइत अछि । एहि तथ्यकें सब दिनसँ स्वीकारल गेल अछि आ युनेस्को सेहो एहि गपकें स्पष्ट कऽ देने अछि जे शिक्षाक माध्यम, खास कऽ कए वाल वालिकाक प्रारम्भिक शिक्षाक माध्यम, जँ मातृभाषा होइत अछि तऽ वाल वालिकाक तार्किक क्षमता, सिखाइ प्रतिक आकर्षण आ शिक्षालय प्रतिक लगाव बेसी बढ़ैत अछि । खास कऽ कए पहिल विद्यालयमे वाल कक्षामे प्रवेश कएलाक बाद जँ ओ अपन मातृभाषाक प्रयोग होइत नहि देखैत अछि आ ओकर शिक्षक आन भाषा बजैत ओ पबैत अछि तऽ शिक्षा प्रति ओ आकर्षित नहि भऽ पबैत अछि । तार्किकता आ संज्ञानात्मक क्षेत्रमे प्रवेश करएमे भाषा एकटा पैघ बाधा उत्पन्न कऽ दैत अछि ।
नेपालमे नेपाली मातृभाषा रहल वाल वालिकासभक सिखाइक स्तर आ संज्ञानात्मक पक्ष अपेक्षाकृत सबल जकाँ रहबाक पाछाँ इहो एकटा कारण अछि, जैं कि ओसभ अपन मातृभाषा नेपालीमे प्रारम्भेसँ शिक्षा पएबाक सुअवसर प्राप्त कएने रहैछ । एकर विपरीत नेपाली इतर मातृभाषा रहल वाल वालिकासभकें ओकर मातृभाषाक माध्यमसँ शिक्षण नहि भेलाक कारणें ई स्वर्णिम अवसर नहि भेटैत अछि ।
इएह कारण अछि जे नेपाल सहित विश्वक अधिकांश देशसभक भाषिक अल्पसंख्यकसभ साक्षरताक अभियानमे सहभागी नहि होमए पबैत अछि आ तैं निरक्षरताक मोनिसँ ओसभ बाहर नहि निकलि सकैत अछि । विश्वक अधिकांश शैक्षिक प्रणाली खास प्रभुत्व जमा कऽ बैसल भाषाटाकें एकलौटी रूपमे प्रयोग करैत आएल पाओल जाइछ, जेना नेपालमे नेपाली भाषा, भारतमे हिन्दी भाषाकें एकलौटी रूपसँ प्रयोगमे आनल गेल अछि सभ क्षेत्रमे । परिणामस्वरुप आन भाषासभ आ ओ भाषा बाजए बला विद्यार्थीओसभ वहिष्करणमे पड़ि जाइत अछि । बालबालिकासभकें जँ विद्यालयक पहिले दिनसँ ओकरासभक स्पष्टसँ बुझए बला आ बाजए सकए बला भाषामे सिखबाक अवसर प्रदान कराओल जाए तऽ एहेन विद्यार्थी आ ओकर साथीसङ्गी तथा परिवारजनसभकें सेहो महत्वपूर्ण फाइदा होएत । एकर सङ्गहि साक्षरता दिवस सालमे कर्मकाण्डी रूपसँ एक दिन उत्सवक रूपमे मना कऽ औपचाकितेटा निर्वाह करए बला दिवस नहि भऽ वास्तविक रूपमे एहिसँ साक्षरताक अभिवृद्धि होमए सकत । विगत पचास वर्षसँ संसारे भरि साक्षरता दिवस मनाओल जाइत रहलो पर एखनहुँ धरि नेपाल सहित विश्वक कतिपय देशसभमे निरक्षरता उन्मूलन नहि भऽ सकबाक कारण आओरो जेसभ होए, एकटा प्रमुख कारण इहो अछि जे प्रौढ़ शिक्षो जकाँ कार्यक्रमसभक माध्यम मातृभाषाकें नहि बनाओल जाइछ आ साक्षरता कार्यक्रमसभ सेहो वास्तविक सेवाग्राही धरि नहि पहुँचि बाटेमे कागजेमे मिलान होइत रहि जाइत अछि ।
नेपालमे १२३ टा भाषासभ बाजल जाइत अछि । एहि भाषासभमेसँ ७१ टा लोपोन्मुख अवस्थामे रहल अछि । नेपालमे ९६ प्रतिशत जनसंख्या उनैसटा प्रमुख भाषासभ बजैत अछि तऽ बाँकी भाषासभ मात्र ४ प्रतिशतद्वारा बाजल जाइत अछि । तैं बहुते रास भाषासभक लेल प्रभावकारी शैक्षिक नीति, रणनीतिसभ बनाओल गेनाइ आ तकरा लेल पर्याप्त श्रोतक व्यवस्था भेनाइ जरुरी अछि ।
मातृभाषाक माध्यमसँ प्रारमिभक शिक्षा देलासँ एक दिश वाल वालिकाक उपलब्धिमूलक सिखाइ होइत अछि आ दोसर दिश लोकसभमे भाषिक गौरववोध भऽ राष्ट्रीयतामे सेहो अभिवृद्धि होइत अछि ।
तैं सब सरोकार वालाकें एहि दिश ध्यान देबाक चाही आ साक्षरताकें शत प्रतिशत करबाक लेल मातृभाषाक प्रयोगक सङ्गहि स्थलगत कार्यान्वयनमे तदारुकता अपनाओल जेबाक आवश्यकता सेहो अछि । जँ से नहि भेल तऽ ई अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस कर्मकाण्डी बर्थडे पार्टी बनि कऽ नहि रहि जाएत से कहल नहि जा सकैछ । (लेखक मैथिली साहित्य परिषदक पूर्व अध्यक्ष आ भाषा प्रशिक्षक छथि ।)