बिटु मिश्रा ‘वत्स’

फेर एलै परुकें सन पावनि,
लाड़नि-खापड़ि भेल ओरियान !
चहल-पहल कन्सारक सोझां,
थहा-थही छै भीड़ जुटान !!
घर-घर एगो उमंग पसरि गेल,
आबितहिं परव तिला- सकरांइत !
मैथिल ने बिसरथि ई पावनि,
गाम रहथु वा रहथु बिलांइत !!
तील बहब छन्हि संस्कार में,
सदति रखथि एहि बातक ध्यान !
चहल पहल कन्सारक……..
भिनसुरबा में धिया-पुता सब,
पोखरि-धार-इनार नहाय !
लागल सभक चंगेड़ी-मउनी,
चुल्लड़ि-मुल्लड़ि तिलबा खाय !!
घेरि क’ बइसल सब नवतुरिया,
धह्-धह् धधरा बीच दलान !
चहल-पहल कन्सारकं………..
चूड़ा-दही कतौ आयोजन,
कतौ घी खिच्चड़ि दही अचार !
भांति-भांति के तरुआ-पापड़,
लागए रंग-विरंग सचार !!
श्रद्धा सँ ब्राह्मण भोजन आ,
यथा शक्ति अन्न कें दान !
चहल-पहल कन्सारक……….
अप्पन ई पावनि अनुपम सन,
मोल एकर नहिं ई अनमोल !
हेरि-जोहि बरु सगरो आयब,
पायब पुनि ई दुनियां गोल !!
सभ्य-सुशील संस्कृति अप्पन,
तैं अछि मिथिला माटि महान !
चहल-पहल कन्सारक……….
फेर एलै परुकें सन…………..