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शिक्षा पाबए दिअ

शिक्षा पाबए दिअ
pratibha jha
प्रतिभा झा

प्रतिभा झा
जिनगी लागि रहल, बोझ बनि गेल
विलिन भऽ रहल अई आशाक किरण
बहैत धार सन नीर बनि गेल
भेटल नहि बाटमे कोनो सङ्गम
दुर देशक दासीक उपमा
क्षणमे टुटल सभ सपना
तैयो प्रत्यन अछि, निरन्तर
बिन्ती हमर करु बेटाबेटीमे अन्तर
जुनि उठाउ धीपल आँगुर
जुनि पठाउ काँच वयसमे सासुर
किए बनतीह ओ केकरो दासी
जहन बर्षोसँ छथि दू आखर प्रेमक प्यासी
धीयाक कहब…
आश करैत छी होएब शिक्षित
मन अछि करी स्वर्ण किरण विकसित
ज्योति ओहि किरणके सोेंसे परतैक
धीया लेल आशाक बाटके दीप जगतैक
आबो सङ्ग दिअ हमर
जनम धर्तीपर पछिला पूण्य कर्म छियैक हमर
बिन्ती की करी हम ?
अछि सभगोटेके प्रणाम
नहि करब भेद तऽ,
बढायब हमहुँ शान
तहनो सभसँ अनुरोध
नहि करु धियापुतामे विभेद
अधिकारके नहि गुमाबए दिअ
शिक्षा पाबए दिअ ।

About The Author

लेखक यादव पत्रकारिताका साथै भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन, ऐतिहासिक एवम् पुरातात्विक क्षेत्रमा कलम चलाउँछन् (सं) ।

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