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बाबूजी

बाबूजी

आरती झा

दुनू बाल-बच्चा आ पति अजीत संग छोट सन गृहस्थी मेँ नून- रोटी खाएत खुशहाल जीवन बीता रहलि ज्योति एहि बेर लगभग दू बरख पर नैहर जा रहलि छलीह।सोचैत छलीह जाय लेल मुदा किछु ने किछु फेरा लागि जाइत छलन्हि।पछिला बरख ससुरक बेमारी आ हुनक निधन तहिना कोनो ने कोनो समस्या आबि कऽ सोचल बात नहि भऽ रहल छलनि ।

एतेक दिन बाद सबसँ भेँट होयत , सोचिए कऽ मोन आनंद सँ विभोर भऽ रहल छलनि।माय के मुइला के बाद बाबूजी जेना नितांत एसगर भ गेल छलथिन।कहबाक लेल तऽ बेटा-पुतोहु आ पोता-पोतीसँ घर भरल छलनि मुदा…..13308613_1083490458364507_6579996332229249083_o
मोतियाबिंद के ऑपरेशन सफल नहि रहल उपरांत बाबूजी के आँखि नहि सुझैत छलन्हि।ट्रेन चारि बजे साँझ मे जयनगर पहुँचय के स्थान पर राति के आठ बजे पहुँचल।ओतयसँ टमटम पकड़ि जखन ज्योति अँगना पहुँचलीह तऽ बड्ड अबेर भ गेल छलै, ज्योति देखलीह जे बाबूजी के आगाँमेँ थारी राखल आ ओ ओहिमे हथोरिया मारैत।आ कात दऽकऽ कुकुर जायत आ ओकरा मुँहमे सोहारी।आहि रौ बा! इ गति मे हमर बाबूजी! ह्रदय वेदना सँ भरि उठल ज्योति केर , बेकल मोन जेना चीत्कार कऽ उठल।ज्योति बाबूजी केँ गोड़ लगैत जोर सँ कानय लगलीह।बाबूजी कहलखिन्ह जे धुर बताह छी अहाँ किया कनैत छी?कहली ज्योति जे बाबूजी अहाँक इ हालत हमरा देखल नहि जा रहल अछि।बाबूजी बजलाह जे अनेरे चिंता किएक करैत छी , सभ बहुत खयाल रखैत अछि । खाली आँखिये टा ने !’ आ कहैत आगुक पाँती कतौ हेरा गेलनि…

About The Author

लेखक यादव पत्रकारिताका साथै भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन, ऐतिहासिक एवम् पुरातात्विक क्षेत्रमा कलम चलाउँछन् (सं) ।

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