हक्कन कानैत अछि बाध बोन हमर
उठलै कोन टीस कचकैए मोन हमर
धोखर’ लगलै आँगनमे पारल अरिपन
कोना टलहा भेलै भावक सोन हमर
नियति समयके लाड़ैन सँ उलबैत रहल
मनुख छी बदलल नञि दृष्टिकोण हमर
आइ बड़ एसगर छै हलहल फूलल गाम
जिनगी शहरक छ’छा देलकै पोन हमर
ठूठ भेल गाछ-बिरिछ बाट जोहैत वसंतक
कुहकैत पुछैए कोइली दोख कोन हमर
देखियौ रोगिया गेलै दबाइ-दारुओ आब त’
काज करबे नञि करैत छै जोग-टोन हमर
मैथिल प्रशान्त
दुर्गौली, बेनीपट्टी