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गजल

गजेन्द्र गजुर, लहान

दु आखर किछू, हिआ भरि छजल अछि ।
नइ गजुरकऽ कविता, या गजल अछि ।।
कागतेटा पर, कलमक नोक घसैत छी ।
निरक्षर मोनमे, सरस्वती उतरल अछि ।।
पछिया झाटय, बिहारि गञ्जन स’ भुमि ।
तैयो नेहक पुष्प, जेना कतेऽ मजरल अछि ।।
ओझराएल सोझराएल, शब्द बान्हल खोपा ।
ससरी बन्हन झोंटाक, उजरल अछि ।।
सोझा की पाछु कऽ आगि मिझाबी, थाह नै ।
गजुरके किएक, एत मन्दिर जरल अछि ।।