• |
समाचार भिडियो अडियो विविध हाम्रो बारेमा

गजल

जुट्टीजकाँ हम गुहायल रही (प्रेम दिवस विशेष)

जुट्टीजकाँ हम गुहायल रही (प्रेम दिवस विशेष)
10960209_771057369630150_2217772708148597105_o
तस्विरःसाहित्यकार रुपा झा

धीरेन्द्र प्रेमर्षि

भलहि संसारसँ हम अघायल रही
मुदा नेहक पियासे सोन्हायल रही
किछु कहब ने हम ने किछु अहाँ कही
बस जुट्टीजकाँ हम गुहायल रही

राति ससरैत रहए चाहे भऽ जाइक भोर
बात पसरैत रहए चाहे भऽ जाइक शोर
अछि अजबारल मोनक मटकूरी प्रिये
सुसुम नेहसँ जमाबी एहि जिनगीक दही
किछु कहब ने हम ने किछु अहाँ कही
बस जुट्टीजकाँ हम गुहायल रही

लेलहुँ आइए प्रिये अपन मनमे हम ठाइन
अहीँ हम्मर छी जिनगी, हमर भेलेन्टाइन
जे गलए ने जरए आ ने फाटए प्रिये
दुनू दिलमे झट कऽ ली एक–दोसरक सही
किछु कहब ने हम ने किछु अहाँ कही
बस जुट्टीजकाँ हम गुहायल रही