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  • कोना अहि देशके जल्दीये उद्धार हेतै ?

    स्व.चन्द्रशेखर लाल कर्ण ‘शेखर’ जौं गहनखौक सरकार रहतै उघने नारा अपार रहतै फरफैसकी ईजहार रहतै जौं खुरलुच्ची ...

    स्व.चन्द्रशेखर लाल कर्ण ‘शेखर’ जौं गहनखौक सरकार रहतै उघने नारा अपार रहतै फरफैसकी ईजहार रहतै जौं खुरलुच्ची मतियार रहतै फेर कोना अहि देशके जल्दीये उद्धार हेतै ? जौं थोपले दरिद्रीक कपार रहतै भिनकैत भेदक ...

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  • जुट्टीजकाँ हम गुहायल रही (प्रेम दिवस विशेष)

    धीरेन्द्र प्रेमर्षि भलहि संसारसँ हम अघायल रही मुदा नेहक पियासे सोन्हायल रही किछु कहब ने हम ने किछु अहाँ क ...

    धीरेन्द्र प्रेमर्षि भलहि संसारसँ हम अघायल रही मुदा नेहक पियासे सोन्हायल रही किछु कहब ने हम ने किछु अहाँ कही बस जुट्टीजकाँ हम गुहायल रही राति ससरैत रहए चाहे भऽ जाइक भोर बात पसरैत रहए चाहे भऽ जाइक शोर अ ...

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  • तिरष्कार

    विन्देश्वर ठाकुर बर्षो भेल एहि नेतागणके तेल लगाक’ सोटि रहल छी अपनहि हाथे अपन माथ कडा पत्थर प’ ठोकि रहल छी ...

    विन्देश्वर ठाकुर बर्षो भेल एहि नेतागणके तेल लगाक’ सोटि रहल छी अपनहि हाथे अपन माथ कडा पत्थर प’ ठोकि रहल छी । एक जुट भऽ भोट दियैलौ सडक सँ संसद पहुँचेलौं सुखल चुरा माउसक लोभे नै जानि आरो कि कि केलौं ? बस ...

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  • -गजल-

    -नन्दलाल आचार्य केहेन उजाड जँका सुनसान देखैछी मात्र पत्थरे छै कहाँ भगवान् देखैछी ? नाम जपिक खाइबला भेलै ब ...

    -नन्दलाल आचार्य केहेन उजाड जँका सुनसान देखैछी मात्र पत्थरे छै कहाँ भगवान् देखैछी ? नाम जपिक खाइबला भेलै बुद्धिमान् भ्रष्ट पदलोलुप मात्रे महान् देखैछी । केहेन उजाड जँका सुनसान देखैछी मात्र पत्थरे छै कह ...

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  • कोशिश करनें वालों की कभी हार नही होती।

    - श्री हरिवंशराय बच्चन लहरों से घबराकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। नन्हीं ...

    - श्री हरिवंशराय बच्चन लहरों से घबराकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है, चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है, मन का विश्वास रग मे साहस भरता है ...

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  • नव वर्ष शुभ हो

     अशोक दत्त वर्ष २०१५ के देल टीस बिसरऽ चाहै छी आश अछि तोहर आगमन बिसरा देत सभ पीड़ा । भूकम्पसँ उजरल घर क्षत ...

     अशोक दत्त वर्ष २०१५ के देल टीस बिसरऽ चाहै छी आश अछि तोहर आगमन बिसरा देत सभ पीड़ा । भूकम्पसँ उजरल घर क्षत् विक्षत् भेल परिवार अन्न–वस्त्र आ छतक आभाव जाढ़सँ ठिठुरैत बच्चासँ बूढ़ दवाइ बिनु काहि काटब सब ...

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  • हम सब छी बहुभाषी यौ

    मुरलीधर हम नै पहड़िया हम नै मदेसिया हम छी नेपालक वासी यौ मूल हमर पहिचान नेपालक हम सब छी बहुभाषी यौ रंग बिर ...

    मुरलीधर हम नै पहड़िया हम नै मदेसिया हम छी नेपालक वासी यौ मूल हमर पहिचान नेपालक हम सब छी बहुभाषी यौ रंग बिरंगक भेषभूषा भाषा खान पान यौ सबहक अप्पन रीत थित अपन अपन पहचान यौ हमछी मैथिली भाषी यौ हम भोजपुरिय ...

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  • गीत

    गजेन्द्र गजुर  बच्चो मरए ,बुढवो मरए ललि अधिकार सहिद क आत्मा जरए,डगमगाई नै सरकार । धुधुवा क गोलीबारुद छाती ...

    गजेन्द्र गजुर  बच्चो मरए ,बुढवो मरए ललि अधिकार सहिद क आत्मा जरए,डगमगाई नै सरकार । धुधुवा क गोलीबारुद छाती मे मारे नित दिने । कतेक दिन ओगरवै नेपाल -आब लडबै भिने । के सुनतै हो माइ मधेश क पुकार ।। थालम थ ...

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  • मैथिली साहित्यको एक उपलब्धि ः ‘जीवनदान’

    –नन्दलाल आचार्य एउटा छोटो कथा भनौं, त्यसले मेरो कुरो बुझिन्छ होला । एउटा, कस्तो भयो भने, एकदिन बिहान–सवेर ...

    –नन्दलाल आचार्य एउटा छोटो कथा भनौं, त्यसले मेरो कुरो बुझिन्छ होला । एउटा, कस्तो भयो भने, एकदिन बिहान–सवेरै एउटी बूढी आइमाई आएर गाउँको कुवामा केही हाली र भनी, अब जसले यो कुवाको पानी खान्छ, त्यो पागल हु ...

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  • आजादी

    ~गजेन्द्र गजुर~ हनुमाननगर-२, सप्तरी आजादीके ज्वाला दनकैत रहतै, ओसब ओहिना फनकैत रहतै, जुलुम कले चिच्यानञि ...

    ~गजेन्द्र गजुर~ हनुमाननगर-२, सप्तरी आजादीके ज्वाला दनकैत रहतै, ओसब ओहिना फनकैत रहतै, जुलुम कले चिच्यानञि रति भरि, चाहे बिरुद्धमे सनकैत रहतै, इन्कलाम जिन्दाबाद ऽ क नारा भेल, नसंहारी अहिना झरकैत रहतै, उ ...

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