• युवककाे विभत्स दृष्य र मेरो रिपोर्टिङ्ग

    सोनु दास । सधैं झैँ बिराटनगरस्थित मकालु टेलिभिजनमा समाचार वाचन गर्नकालागि अफिस आइपुगें । जसरी म, मिन दाई ...

    सोनु दास । सधैं झैँ बिराटनगरस्थित मकालु टेलिभिजनमा समाचार वाचन गर्नकालागि अफिस आइपुगें । जसरी म, मिन दाई र मीना दिदी अफिसमा थिए । बिहानको ७ देखि ८ बजेसम्मको न्यूज पढेँ । अनि, त्यसपछि पुनः म आफनो न्यूज ...

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  • रसभरीके बोरमे रसगर कत’ भेटत ?

    ब्रजमोहन झा, जनकपुर रसभरीके बोरमे रसगर कत’ भेटत गेल अदरा आम आब कसगर कत’ भेटत जिबैय हमरा देहमे, दश बिस आदम ...

    ब्रजमोहन झा, जनकपुर रसभरीके बोरमे रसगर कत’ भेटत गेल अदरा आम आब कसगर कत’ भेटत जिबैय हमरा देहमे, दश बिस आदमी तैयो ताकै छी “मोहन” असगर कत’ भेटत ।   बिहुसैय फुलल गाल, देखि कनियाके ऐना कि लोटय करेजा स ...

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  • शिक्षा पाबए दिअ

    प्रतिभा झा जिनगी लागि रहल, बोझ बनि गेल विलिन भऽ रहल अई आशाक किरण बहैत धार सन नीर बनि गेल भेटल नहि बाटमे क ...

    प्रतिभा झा जिनगी लागि रहल, बोझ बनि गेल विलिन भऽ रहल अई आशाक किरण बहैत धार सन नीर बनि गेल भेटल नहि बाटमे कोनो सङ्गम दुर देशक दासीक उपमा क्षणमे टुटल सभ सपना तैयो प्रत्यन अछि, निरन्तर बिन्ती हमर करु बेटा ...

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  • प्रेमको अंकुरण

    नन्दलाल आचार्य प्रिय ज्योति ! आज म तिमीलाई सुनाउनै नहुने कुरा सुनाउँदै छु । आफूलाई देखाउन मैले कुनै कसर र ...

    नन्दलाल आचार्य प्रिय ज्योति ! आज म तिमीलाई सुनाउनै नहुने कुरा सुनाउँदै छु । आफूलाई देखाउन मैले कुनै कसर राख्न नमिल्ने हुनाले रिठ्ठो नबिराईकन अवगत गराउन खोज्दै छु । मभित्रका गन्थन बुझेपछि तिमी गुनासोरह ...

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  • सन्दर्भः ‘गरुराहा’ उपन्यासको मुख्य रचनागर्भ

    –नन्दलाल आचार्य विहान सबेरैदेखि कर्मपथमा जुट्नु, दिउसो केही घण्टा विश्रामको श्वास फेर्नु, साँझतिर कलेजहरू ...

    –नन्दलाल आचार्य विहान सबेरैदेखि कर्मपथमा जुट्नु, दिउसो केही घण्टा विश्रामको श्वास फेर्नु, साँझतिर कलेजहरू धाउनु र वातावरण अँध्यारिँदै गएपछि तरकारी हटिया छिर्नु मेरो दैनन्दिन थियोे । मेरो चिनजानको संसा ...

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  •  बाँतर

    मैथिल प्रशान्त हे प्रिय नञि प्राणो सँ प्रिय ------ बाँतर अछि हमरा लेल , ई गेना गुलाब चान इजोरियाक राइत , ...

    मैथिल प्रशान्त हे प्रिय नञि प्राणो सँ प्रिय ------ बाँतर अछि हमरा लेल , ई गेना गुलाब चान इजोरियाक राइत , बाँतर अछि चॅर चाँचर गम्हरायल धान हरियर नूँआ जँका पसरल गहूमक खेत साँचे प्रिय बाँतर अछि कोइलीक कू ...

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  • बाबूजी

    आरती झा दुनू बाल-बच्चा आ पति अजीत संग छोट सन गृहस्थी मेँ नून- रोटी खाएत खुशहाल जीवन बीता रहलि ज्योति एहि ...

    आरती झा दुनू बाल-बच्चा आ पति अजीत संग छोट सन गृहस्थी मेँ नून- रोटी खाएत खुशहाल जीवन बीता रहलि ज्योति एहि बेर लगभग दू बरख पर नैहर जा रहलि छलीह।सोचैत छलीह जाय लेल मुदा किछु ने किछु फेरा लागि जाइत छलन्हि ...

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  • कचकैए मोन हमर 

    हक्कन कानैत अछि बाध बोन हमर उठलै कोन टीस कचकैए मोन हमर धोखर' लगलै आँगनमे पारल अरिपन कोना टलहा भेलै भावक स ...

    हक्कन कानैत अछि बाध बोन हमर उठलै कोन टीस कचकैए मोन हमर धोखर' लगलै आँगनमे पारल अरिपन कोना टलहा भेलै भावक सोन हमर नियति समयके लाड़ैन सँ उलबैत रहल मनुख छी बदलल नञि दृष्टिकोण हमर आइ बड़ एसगर छै हलहल फूलल गा ...

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  • हमहूँ कविता लिखैत छी

    डा. अखिलेश झा सचसँ दूर भागि कल्पनामे जागि विहार करैत छी हमहूँ कविता लिखैत छी जगतक वेदना सुना कऽ सबसँ दरेग ...

    डा. अखिलेश झा सचसँ दूर भागि कल्पनामे जागि विहार करैत छी हमहूँ कविता लिखैत छी जगतक वेदना सुना कऽ सबसँ दरेग पाबि कऽ सन्तोष करैत छी हमहूँ कविता लिखैत छी वाक्य विन्यासक वंशीसँ शब्दक फेकल जालसँ कल्पनाक माछ ...

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  • गजल 

    कुन्दन कुमार कर्ण जनतन्त्रमे जन राज्यसँ डेरा रहल छै अपने चुनल सरकारसँ पेरा रहल छै कानूनमे अधिकार मुदा काज ...

    कुन्दन कुमार कर्ण जनतन्त्रमे जन राज्यसँ डेरा रहल छै अपने चुनल सरकारसँ पेरा रहल छै कानूनमे अधिकार मुदा काजमे नै स्वतन्त्रता अभ्याससँ हेरा रहल छै ठेकान नै कुर्सीक कखन के लऽ जेतै सत्ताक भागी जल्दिसँ फेरा ...

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