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मिथिलामें आन्दोलन सम्भव हएत वा सोच हास्यास्पद !

मिथिलामें आन्दोलन सम्भव हएत वा सोच हास्यास्पद !

करुणा झा

सोशल मीडिया पर हड़कंप मचल अछि । मिथिला समेत पूरा देश आ दुनियामें पसरल मैथिल क्रान्तिवीर सब शब्दक तीरस’ बिहार सरकारके बेधएमें लागल अछि । किछु केंद्र सरकारपर सेहो शब्दाग्नि स फूँफकार छोड़बामें लागल अछि । ट्विटर, फेसबुक, इन्स्टाग्रामसहित जतेक माध्यम छै । सब जगह मैथिल एखन प्रथम श्रेणीके क्रांतिकारी प्रमाणित भ रहल अछि. मिथिला राज्य निर्माणक लेल उताहुल अई क्रान्तिवीर सबहक पोस्ट पढू त मानसिक उद्वेलन सहजे शुरू भ’ जायत ।
मिथिला क्षेत्रके पहिचान सदास’ अध्ययनशील, वैचारिक, परमुखापेक्षी, राज्याश्रित, नमनीय व्यक्तित्वक समूहमें रहल अछि । क्रान्ति केनाई वा कोनो तरहके द्वन्द्वमें फँसि अपन जीवन जोखिममें देबएवाला मानसिकता मैथिलके कहियो नै रहल. किछु अपवाद जरुर छै धरि सामग्रीक रूपे देखल जाय त मैथिल विगत कईएक सदीस’ शासन व्यवस्थाके अनुरूप अपनाके परिवर्तित कय कोनोहु सम्मानजनक जीवनयापन के महत्व देलाह ।
मैथिलके एकटा वर्ग सदा स पूजा–पाठमें विशेष आग्रही रहलाह । जे कोनो देव–देवी होइथ हुनकर पूजन(अर्चन)कीर्तन करैत प्राप्य दान वा दक्षिणास’ अपन जिविकोपार्जनके व्यवस्था करएवाला ई वर्ग कहियो वैज्ञानिक चिन्तनके महत्व नै देलनि भलेही विज्ञानके प्रादुर्भावस’ जीवनके सहज, सरल बनाब बला सबटा अन्वेषण के ई आत्मसात कयलनि आ अपना सन्ततिके सेहो कोशिस केलनि जे ओ पुरहिताई छोड़ीं कोनो आन धन्धामें मोन लगाबैथ ।
हमरा अनुभवस’ देखल जे पैघ शहरमें मैथिल विशेषतः अध्यापन, पुरहिताई, दरबानी, मुनीमगीरी, भनसिया आ’ बेगाड़क नौकरीमें गेलाह जाहिस’ स्थायी तनखाहके अतिरिक्त किछु अतिरिक्त प्राप्तिके योग होय एक समय मैथिलके ईमानदारी आ’ सत्यवादिता विश्वसनीय छल ।
कालान्तरमें जखन शिक्षाके महत्व बढ़लई त मैथिल किशोर सब आधुनिक शिक्षणके प्रभावस’ नवनव क्षेत्रमें स्थान दखल केलनि आ ओहिमें अपन सार्थकता सेहो प्रमाणित कयलनि । समग्र देश आ दुनिया में राजनीतिक परिवर्तनके दिशा आ’ दशा देखिकए किछु मैथिल राजनीतिमें अपन अस्तित्व तकबाक फिराक में छथि आ सम्पूर्ण मिथिला राज्यक परिकल्पना हुनकरे सबहक मानसिक उपजस’ प्रमाणित धरि एकटा राज्यक निर्माण लेल जे आवश्यक संरचना आ संसाधन आवश्यक तकर उपलब्धिता कतेक छै से सब दिन स संदेह में रहल.
आजुक मिथिला क्षेत्र आ’ मैथिलके देखू त स्थिति स्पष्ट भ’ जायत । मिथिलाके जतेक जनसंख्या छै ओकर सिंहभाग प्रवासी छै कियैक त मिथिला क्षेत्रमें कल कल–कारखाना नहिके बराबर अछि । स्थानीय रोजÞगार के स्त्रोत सेहो नगण्य. दोकानदारी वा कृषिमे आधारित व्यवसायके लेल जे पूँजी आ परिश्रम चाही मैथिल लेल से असम्भव. सदास’ अपनेमें मस्त रहएबला मैथिल खेतीबाड़ी, भजन–कीर्तन, भांग आ’ स्वांगस’ बेसी सोच नै रखैत छथि । अपना भैयारी वा पटीदारीमें भने कपरफोरव्वलके लेता धरि जखने कोनो सामाजिक मुद्दा अबैछै त चतुर मैथिल धीरे स कात भ जेता कियैक त क्षणिक लाभ के पक्षधर मैथिल दूरगामी परिणाम आ परिवेश के महत्व नै देलनि कहियो.
एखन जे आभासी दुनियाँमें बकवासी आन्दोलन सब जोर पकड़ने अछि तकर प्रयोजन आ प्रकार बुझबै त हँसी लागत. पूरा विश्व जखन कोरोना महामारी स त्रस्त अछि तखन एहि व्याधिस’ मिथिला क्षेत्रके बचाबक कोनो सामाजिक आन्दोलन वा स्वास्थ्यजनक सतर्कता नहि देखाक मैथिल समूह दरभंगा एयरपोर्ट, मिथिलामें उद्योग, मिथिलाक्षरके प्रचार–प्रसार, मैथिलीमें पढ़ाईके ल’ कए आन्दोलित भेल छथि ।
सबके बूझल छै जे कोरोना बा राष्ट्रीय समस्या के अलावा कोनो आन्दोलन एखन सफल नै हेतै, कियाक त जखन सबके अपने जान जपाल छै त आन्दोलन करत के ? लोक अपन घर–संसार, बाल–बच्चा देखत कि आन्दोलनमें कूदि सबटा गमाओत? किछु सक्षम, उच्चपदस्थ, चिन्तामुक्त, वौद्धिक विलासिता करए बला समूह के कहने मिथिला में आन्दोलन सम्भव हैत ई सोच हास्यास्पद ।
सबस पहिने मिथिला क्षेत्रके सामूहिक अध्ययन कए एतुक्का वैशिष्ठ्य, समस्या, समाधान आ’ स्थानीय निवासीके जीवनशैलीके उन्नति पर निरंतर आन्दोलनके रूपरेखा बनाबै जाऊ त भने आम मैथिल आहाँके समर्थनमें आगू ओउता नहि त शोसल मिडिया पर शब्दालंकारके शोभनीय–अशोभनीय भण्डार चायके सङ्ग नमकीन जँकां औपचारिक बुद्धि विलास मात्र रहि जायत ।
(लेखिका झा, मुख्यतया मैथिली आ हिन्दीमे निरन्तर कलम चलवैत आबिरहल छथि ।)

About The Author

लेखक यादव पत्रकारिताका साथै भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन, ऐतिहासिक एवम् पुरातात्विक क्षेत्रमा कलम चलाउँछन् (सं) ।

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