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मिथिलाक पावनि प्रकृतिके आराधना

मिथिलाक पावनि प्रकृतिके आराधना

–करुणा झा
मिथिला अपन स्वर्णिम अतित आ गौरवमयी इतिहासक लेल विश्व प्रसिद्ध अछि । मिथिलाक गौरव गाथा कला, संस्कृति, संस्कार, लोक पर्व, लोकगीत, साहित्य अद्वितीय अछि । मिथिलामें प्रत्येक मासमें कोनो न कोनो पर्व आ’ प्रत्येक मासके गीत सेहो अछि । मिथिला कऽ संस्कृतिमें पूजा–पाठके विशेष महत्व अछि । मिथिलाञ्चलके जतेक भी पावनि अछि सब प्रकृति पूजा या प्रकृति प्रेमसँ जुडल अछि । हरेक पावनिमें प्रकृति आ’ पर्यावारणके महत्व देखल जाइत अछि । मिथिलाञ्चल समेत पूरा नेपाल आ’ भारतवर्षमें मनाओल जायवाला एकटा महत्वपूर्ण पावनि अछि ‘वट सावित्री’ ।
वट सावित्रीमें वट आ’ सावित्री दुनु के महत्व अछि । एकर नामेस’ स्पष्ट होइत अछि जे वटवृक्षके अहिमें विशेष महत्व अछि । ज्येष्ठ मासक आमावश्या तिथिके मनाओल जायवाला वट सावित्री व्रत सम्पूर्ण नारी जातीके लेल महत्वपूर्ण पावनि अछि । पतिके यमराज मुहसँ वापस आनि अपन सुहागक रक्षा कएने सावित्रीके कथा मूलतः पर्यावरण संरक्षण, प्रकृतिकऽ सन्तुलनस’ जोडल गेल अछि । वट वृक्ष एकटा बहुत लम्बा आयुवाला वनस्पति पृथ्वी पर ईश्वर के वरदान अछि । वट वृक्षके पात, छाल, फूल, फल सब औषधीय गुण सँ परिपूर्ण अछि । एकर पोषण आ’ संरक्षण कोना होयत तकरा वास्ते हमर सबके पूर्वज बहुत ही वैज्ञानिक आधार पर एकर निर्माण केलनि आ’ ज्येष्ठ आमावश्याके दिन सावित्रीके पति सत्यवानके वट वृक्षके धाेंधरिमें रहल सर्पक दंशसँ मृत्यु भेल छल तकरा वास्ते ओहि दिन वटवृक्षके जडिमे दुध लाबा चढा कए नागदेवताके सेहो प्रसन्न राखि आ’ नागदेवताके सेहो ओइ दिन दुध, लाबा, पानि सब भेट जाय । ताहि वास्ते ई वटके सावित्री सँ जोडि आ’ धर्मसँ जोडि कए एकदिन पर्यावरण आ’ प्राणी दुनु के संरक्षण, सम्वद्र्धन वड्ड अदभूत अछि । अपन सबके पावनि अदभूत छल । अपन सबके पूर्वजओ सब एतयधरि सोच राखैत छल ।
वर्तमान समयमें जहाँ पूरा विश्व माहामारीसँ युद्ध कऽ रहल अछि । पछिम देश सब कतबो प्रगति कऽ लेने होय, मुदा हमर सबहक मिथिलाक संस्कृतिके मुकाबला नई कऽ सकै छथि । ओ सब साँप आ’ चमगुदरी खाक विषाणु पैदा करैत छथि । हमसब साँपके दुध पिया कए पिपर आ’ वरके देवता मानिकऽ पूजा करैत छी । धन्य अछि मिथिलाक संस्कृति ।
                                                                                           (राजविराज निवासी लेखिका झा साहित्यकार एवम् संस्कृतिकर्मी छथि । सं. )

About The Author

लेखक यादव पत्रकारिताका साथै भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन, ऐतिहासिक एवम् पुरातात्विक क्षेत्रमा कलम चलाउँछन् (सं) ।

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