Top_Header_Right_Add

के तपाईले आफ्नो व्यवसायिक विवरण onlinesaptari.com मा राख्‍नु भयो?

तपाईको व्यवसायिक विवरण राख्‍न वा सच्याउन info@onlinesaptari.com मा मेल वा 9804752133 मा सम्पर्क गर्नुहोला ।

बुद्ध, तुम कब आओगे… ?

बुद्ध, तुम कब आओगे… ?

कैलाश महतो
हर साल बैशाख में तेरे, याद में लोग चिल्लाते हैं,
उसी तिथि पर, उसी मिति पर, फरियाद लोग सुनाते हैं ।
न तुम होते हो, न वो दिन होता है, होता है दिखावा केवल,
संस्थायें होती हैं, संस्थापक होते हैं, जपते तेरे नाम के लेवेल ।

कैलाश महतो

बुद्ध आओ, देखो, देखो तुम्हारी दुनियाँ है कैसी,
तुमने हमें जो दुनियाँ दी थी, तेरी दुनियाँ अब न है वैसी ।
बिगडा तेरा घर संसार सब, क्यों किया किसपे ऐतवार तब ?,
आकर देखो वतन को अपने, कैसे हुए हैं चिरफार अब ।

वसुधा की वो सम्यक तुम्हारा, गुम हो गयी है वादों में,
कब आओगे, नयन बिछाये, बैठे हैं हम राहों में ।
याद न आओ, काम में आओ, महापरिनिर्वाण त्यागो तुम,
जन्मभूमि बना है बंजर देखो, नये अवतार में आओ तुम ।

तुम बने हो मूरत केवल, गोरख धन्धे तेरे नाम पर चलते,
वे करते हैं बिक्री तेरी, मालामाल वो बनते चलते ।
देख लो अपने चक्षु से फिर, शर्म से तुम मर जाओगे,
याद में आना छोड जा अब तुम, नहीं तो खुब पछताओगे ।

About The Author

लेखक यादव पत्रकारिताका साथै भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन, ऐतिहासिक एवम् पुरातात्विक क्षेत्रमा कलम चलाउँछन् (सं) ।