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बेरंग_होली

बेरंग_होली

बटुक ब्रहम्चारी, जनकपुर

छि निसामे हम, तय बहकली कहाँ
छि खिलल गुलाव, तय गमकली कहाँ
मेघ घनगर उठल, पर छै गरजन कहाँ
रंग बरिसबै बदरा किया नोरे जँकाँ
केवो होलौयाके डर सँ पडेलै कहाँ
केव भौजीके आँचर पकड़लक कहाँ
श्याम ओझा बैसल दुधिया सारी बैसल
एक दोसर सँ नयना लड़ौलक कहाँ
नही खंजर चलल, नही मुस्की बहल
नयन सारंग सँ, सर ओ मरलैन कहाँ
छि मुर्छीत पड़ल, लोक बुझत कोना
जँ बुझिए जेतै त’ उठाओत कहाँ
सब छी रंगीन बनल, पर केओ हसली कहाँ
छि त भुते बनल, पर रभसली कहाँ
जहिया पैसा ने छल, रंग भेटैने छल
कादोमे प्रेम चमकै छल, अबरख जकाँ
आई सव किछ भेटल, पर किछु ने रहल
भांग सरबत कहाँ, बास नरकट कहाँ,
डम्फ संगे मतंग भेल ओ नरतक कहाँ
छि निसामे हम….
सम्पूर्ण सहिद प्रती सादर नमन…

About The Author

लेखक यादव पत्रकारिताका साथै भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन, ऐतिहासिक एवम् पुरातात्विक क्षेत्रमा कलम चलाउँछन् (सं) ।