गजल

नारायण मधुशाला हम तऽ कहबौ मरैछेँ तऽ मरि जो । सुखल फूल जकाँ झखरि जो । आ नै चाहैत छेँ जीबैत रही । तऽ ई देह देशक नाम करि जो । कहियो तऽ ककरो काज अएबे । बरु अखने पार उतरि जो । एना पाँछा दिसि हटैके बजाए । कने अगे महे तोँ ससरि जो … Continue reading गजल