गजल

गजल
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के कहैत अछि जे हम अहाँ बिनु मरि जेबै
हम त बहैत दरिया छि समुन्दरमें उतरि जेबै
तरसि जाएब हमर प्रेमक एक एक बून्द लेल
हम प्रेमक बादल छी दोसरो पर बरसि जेबै
एकके छोड़ि जाए सँ कहाँ जिनगी उजरै छै
जेम्हरे प्रेमक सागर भेटत ओम्हरे टघरि जेबै
टुटल दिल केओ अपना नेहमें जे बान्हि लेतै
बाचल पूरा जिनगी ओकरे नाम हम करि जेबै
एक तरेगन बिनु नै रहै छै सूना परल आकाश
जगमग करैत रातिमें फूलझडी बनि झडि जेबै
✍ अशरफ राईन

हालः कतार

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