

धीरेन्द्र प्रेमर्षि
भलहि संसारसँ हम अघायल रही
मुदा नेहक पियासे सोन्हायल रही
किछु कहब ने हम ने किछु अहाँ कही
बस जुट्टीजकाँ हम गुहायल रही
राति ससरैत रहए चाहे भऽ जाइक भोर
बात पसरैत रहए चाहे भऽ जाइक शोर
अछि अजबारल मोनक मटकूरी प्रिये
सुसुम नेहसँ जमाबी एहि जिनगीक दही
किछु कहब ने हम ने किछु अहाँ कही
बस जुट्टीजकाँ हम गुहायल रही
लेलहुँ आइए प्रिये अपन मनमे हम ठाइन
अहीँ हम्मर छी जिनगी, हमर भेलेन्टाइन
जे गलए ने जरए आ ने फाटए प्रिये
दुनू दिलमे झट कऽ ली एक–दोसरक सही
किछु कहब ने हम ने किछु अहाँ कही
बस जुट्टीजकाँ हम गुहायल रही



