अशोक कुमार सहनी माँ जानकी केर जनमभूमि मिथिला । जाही थाम चाकर बनी स्वयं भगवान् शिवशंकर उगना रूप धरी आयल छलाह । मुदा ताहि धरती केर आजुक दिनमें ई विडम्बना अछि जे की अपन अधिकार केर लेल दर–दर भटकी रहल अछि मुदा ओकर गुहार सुननिहार कियोक नहि छैक । विगत किछु दिन स मिथिला या … Continue reading अपन मिथिला आऽ अपन मैथिली भाषा
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