
विन्देश्वर ठाकुर
बर्षो भेल एहि नेतागणके
तेल लगाक’ सोटि रहल छी
अपनहि हाथे अपन माथ
कडा पत्थर प’ ठोकि रहल छी ।
एक जुट भऽ भोट दियैलौ
सडक सँ संसद पहुँचेलौं
सुखल चुरा माउसक लोभे
नै जानि आरो कि कि केलौं ?
बस ओकरे परिणाम थियैक
जे एखनोधरि दुख भोगि रहल छी
अपनहि हाथे अपन माथ
कडा पत्थर प’ ठोकि रहल छी ।
चेतू चेतू आबो चेतू
गुमसुम नंगटे नाच ने देखू
करैए हिजरा ता ता थैया
डेन पकरिक’ बहरा फेकू
भेटत कि जे एना अनेरे
देशके युद्धमे झोकि रहल छी ?
अपनहि हाथे अपन माथ
कडा पत्थर प’ ठोकि रहल छी ।
नै सोचू आब होएत विकास
रोजगारीके छोडू आस
दरेग नामके चिज ने जकरा
करब कि ओकरा विश्वास ?
ढोंगी(फिरंगी कुलंगार संग बुझू
जे शोणित जोखि रहल छी
अपनहि हाथे अपनहि माथ
कडा पत्थर प’ ठोकि रहल छी ।
देशक विचित्र हाल देखैछी
शोषण(दमन खुलेआम देखैछी
युवाशक्ति देशक कर्णाधार होइअ
मुदा ओकरो भविष्य अन्धकार देखैछी
बुझू जे आब अपने सँ अपन
आँखिमे औंरी भोकि रहल छी
अपनहि हाथे अपन माथ
कडा पत्थर प’ ठोकि रहल छी ।
कोना होएत देशक कल्याण ?
कोना रहत निज पुर्खा नाम ?
कोना बचाएब देशक गरिमा ?
कोना राखब अपन पहिचान ?
अपनहि घरमे दूध पीया जऽ
विषधर अजगर पोसि रहल छी
अपनहि हाथे अपन माथ
कडा पत्थर प’ ठोकि रहल छी ।
योगियारा-७, धनुषा
नेपाल हाल दोहा, कतार



