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प्रेमक फुलमे लागल दाग

प्रेमक फुलमे लागल दाग

प्रेमी रविन्द्र ।

नै सुर अछि नै ताल
ई केहन अछि अवाज
हम गबैछि गीत प्रेमके
मुदा अछि बिछोड़क अभास

सहजे कशुर मिलल हमरा
जिनगी बनिगेल बेकार
किया करैछी हम इन्तजार
टुटिगेल प्रेमक गुथल हार

हारल जिनगीकेँ अछि
उजरल हमर उपवन
लराक नैन निरमोहीसे
नै नीन्द मिलल नै चैन

उठैय कखनो हियामें हिलोर
आँखिस हमरा बरसैय नोर
कनैत-कनैत भजाय भोर
याद अबैय जहन उ दिल चोर

भटकिगेलौ हम अपन डोर
लॉगल अछि प्यास बड जोर
कुवा खोजैछी समुन्दरमें
प्यास बुझबिछी पिके ओस

हम लिखैछी मनके व्यथा
सबकियो समझैय कथा
मायापुरी ई नागरीमें
हेरागेल अपने जीवनकेँ सता

हक़ अधिकार बनल अछि
दिलपर उ बेवफाकेँ
जे मारगेल जितेजी हमरा
प्रेमकें रस पियाकेँ

हम जाराइबि दिया प्रेमके जराके
देखाइबि बन्धन प्रेमक निभाके
गंगा सागरसे गहिर प्रेममें
अहाँ गेलियै दाग लगाके

लागल दाग हमरा प्रेमक फुलमें
मुदा बतादिय भेल कोन भुल ये
पुछैय हमरा आँखिस बहैत नोर
हम प्रेम केलौ उहे छल कसूर ये

-सिंहासनी-७, महोत्तरी नेपाल
हाल:-मलेशिया

About The Author

लेखक यादव पत्रकारिताका साथै भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन, ऐतिहासिक एवम् पुरातात्विक क्षेत्रमा कलम चलाउँछन् (सं) ।

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