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आवाज दिअ हम एक छि

आवाज दिअ हम एक छि

करुणा झा      

10407711_692972510800581_8262401848631459279_nकिया मंगई छी अलगे राज ।
किया करैत छि एहन काज ।
जखन सगरे नेपाल अपने अछि ।
सब मिली कऽ बाजु हम एक छी ।
आवाज लगाबु हम एक छी ।

देश प्रदेश मधेशक सपना ।
जुनि बाटु अपने में अपना ।
सर्व भाषा सर्व संस्कृति के मान भेटय ।
से संविधान हो अपना ।

लिम्बुवान किया मांगि रहल छी ।
सगरे नेपाल जौ अपने अछि ।
सब मिली कऽ बाजु हम एक छी ।
आवाज लगाबु हम एक छी ।

चाहे छी हम पहाड के बासी ।
छी हम चाहे मधेश मे ।
कतउ छी हम छी सबस पहिले नेपालवासी ।

थरुहट किया मांग करै छी ।
सगरे नेपाल जौ अपने अछि ।
सब मिली कऽ बाजु हम एक छी ।
आवाज लगाबु हम एक छी ।

शोषण, दमन, भेदभाव, मिटाबी ।
अपन संस्कृति के सम्मान बढावी ।
सब मिली कऽ सब सँ सुन्दर अप्पन देश बनाबी ।

मिथिला राज किया मांग करै छी ।
सगरे नेपाल जौ अपने अछि ।
सब मिली कऽ बाजु हम एक छी ।
आवाज लगाबु हम एक छी ।

स्वार्थमे सब  बनल अछि आन्हर ।
एक दोसर पर फेंके पाथर ।
टुकडा टुकडा भऽ कऽ हम सब बिखडी जाई ।

नै एहन निति वनाबी ।
निति गलत अछि काठमांडु के ।
हम सब ओइ में नई भरमाबी ।

पुरानेपाल त सबके अछि ।
सब मिली कऽ बाजु हम एक छी ।
आवाज लगाबु हम एक छी ।

About The Author

लेखक यादव पत्रकारिताका साथै भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, पर्यटन, ऐतिहासिक एवम् पुरातात्विक क्षेत्रमा कलम चलाउँछन् (सं) ।

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